~ 27 ~
गले मुझ को लगा लो ऐ मेरे दिलदार होली में,
बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में.
नहीं ये है गुलाल-ए-सुर्ख़ उड़ता हर जगह प्यारे,
ये आशिक़ की है उमड़ी अह-ए-आतिश-बार होली में.
गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझ को भी जमाने दो,
मनाने दो मुझे भी जान-ए-मन त्योहार होली में.
'रस' गर जम-ए-मै घैरो को देते हो तो मुझ को भी,
नशीली आँख दिखलाकर करो सर्शर होली में.
- भारतेंदु हरीशचंद्र
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Happy Holi to all!
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