#Hindi
तल्खी तेरी जुबां से चाहे जितने सितम ढा ले
ज़िद हमने भी है ठान ली, पीछे ना हटेंगे
लफ्जों के तीर मत चला, सब बेअसर से हैं
तेरी आंखों में अब भी दिखता, मेरा ही अक्स है
चल मानते हैं हम कभी भी हमसफर ना थे
फिर मुझको रुका देख कर, अब तू क्यूं रुका है
undoubtedlymine
20.01.2019
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