#Hindi
उम्मीदों की खुरचन,
इकट्ठा है दिल में
मैं यूं ही नहीं,
अब भी जिंदा सा हूं
रोक ले तो मुझे,
मैं भी देखूं जरा
तू अगर पत्थर है किस्मत,
मैं भी पानी सा हूं
बेदम हूं बेशक,
पर बेचारा ना सोच
आखिरी दम तक लड़ूंगा,
मैं जिद्दी सा हूं
हैरान क्यूं है
मेरी कोशिश से तू
ऐ मुश्किल! सम्भल जा
मैं पागल सा हूं
undoubtedlymine
27.01.2019
Bạn đang đọc truyện trên: Truyen4U.Com